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बिहार में नई सरकार को लेकर हलचल तेज, नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद सियासी समीकरण बदले

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नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बीच बिहार में नई सरकार को लेकर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में भाजपा की अहम बैठक में नए मुख्यमंत्री और सरकार के स्वरूप पर चर्चा संभव है।

बिहार की राजनीति इन दिनों तेज हलचल के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के साथ ही राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर अटकलें और चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

नीतीश कुमार गुरुवार को ही पटना से दिल्ली पहुंच चुके हैं, जहां वे राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उनके इस कदम को राज्य की सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। उन्होंने खुद भी दिल्ली पहुंचने के बाद यह संकेत दिया था कि अब वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका निभाएंगे। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं।

इसी बीच, दिल्ली में भाजपा की एक अहम कोर कमेटी बैठक होने जा रही है, जिसमें बिहार के राजनीतिक भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। इस बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक का मुख्य फोकस बिहार में नई सरकार के गठन, मुख्यमंत्री के चेहरे और सत्ता के बंटवारे पर रहेगा।

सूत्रों के अनुसार, बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा के भीतर मंथन चल रहा है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं और वे इस महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेंगे। इससे पहले वे राज्यसभा में होने वाले शपथ ग्रहण कार्यक्रम में भी मौजूद रहेंगे, जहां नीतीश कुमार औपचारिक रूप से उच्च सदन के सदस्य बनेंगे।

राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, नई सरकार के स्वरूप को लेकर कई संभावनाएं सामने आ रही हैं। इनमें यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद भाजपा को मिल सकता है, जबकि जेडीयू को सत्ता में संतुलन बनाए रखने के लिए उपमुख्यमंत्री पद दिए जा सकते हैं। यह भी चर्चा है कि जेडीयू की ओर से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, जिनमें एक नाम नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले नेताओं में से हो सकता है।

इसके अलावा, सरकार के विभागों के बंटवारे को लेकर भी समीकरण तैयार किए जा रहे हैं। गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय को जेडीयू के पास रखने की संभावना जताई जा रही है, जबकि भाजपा अपने हिस्से में प्रमुख विभाग रख सकती है। मंत्रिमंडल के गठन में दोनों दलों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि गठबंधन मजबूत बना रहे।

सहयोगी दलों को भी सरकार में प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है। लोजपा (रामविलास) को दो मंत्री पद दिए जाने की चर्चा है, जबकि अन्य सहयोगी दलों को भी सीमित हिस्सेदारी मिल सकती है। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति पदों पर भी दोनों प्रमुख दलों के बीच संतुलन बनाए रखने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

बिहार की राजनीति में यह दौर काफी निर्णायक माना जा रहा है। नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल के बाद सत्ता का यह संभावित बदलाव राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। ऐसे में सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं, जहां लिए गए फैसले आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

विपक्षी दल भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और संभावित बदलावों के आधार पर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होंगे और राज्य में सत्ता परिवर्तन की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकती है।

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